ब्राह्मण विदेशी हैं" यह दावा मुख्यतः 19वीं-20वीं सदी के "आर्य प्रवासन सिद्धांत" (Aryan Migration Theory) से जुड़ा है
कहाँ लिखा हुआ है कि ब्राह्मण विदेशी है ? जानना चाहते हो तो पढिए निम्नलिखित पुस्तकें:- संक्षिप्त उत्तर: आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। हड़प्पा सभ्यता (लगभग 3300-1300 ईसा पूर्व) के पुरातात्विक अवशेषों में वैदिक या ब्राह्मण संस्कृति (जैसी हम ऋग्वेद से जानते हैं) के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलते। यह ऐतिहासिक शोध का एक प्रमुख निष्कर्ष है। विस्तृत व्याख्या और प्रमाण: 1. दफनाने बनाम जलाने की प्रथा: हड़प्पा सभ्यता: हड़प्पाई लोग मुख्य रूप से शवों को दफनाते थे। कब्रिस्तान मिले हैं जहाँ शवों को विभिन्न वस्तुओं (जैसे बर्तन, गहने) के साथ दफनाया जाता था। शवों को जलाने (दाह-संस्कार) के साक्ष्य बहुत कम या नहीं के बराबर हैं। वैदिक संस्कृति: ऋग्वेद (जो हड़प्पा सभ्यता के काफी बाद की रचना है) में मृतकों के दाह-संस्कार (अग्नि में जलाने) का स्पष्ट उल्लेख है। ऋग्वेद (10.16) में अंत्येष्टि से संबंधित मंत्र हैं। यह प्रथा वैदिक आर्यों की एक प्रमुख पहचान थी। निष्कर्ष: यह प्रथाओं का बुनियादी अंतर दर्शाता है कि हड़प्पा के निवासी और वैदिक आर्य अलग-अलग ...