राजेश गुलाटी ने अनुपमा गुलाटी के 72 #टुकड़े किए और D फ्रीजर में रक्खा आफताब ने श्रद्धा के 35 टुकड़े

मायावती ने बुलडोजर एक्शन को "संतोषजनक कार्रवाई" कहा

मोइद के घर फैक्टरी बकरी को गिराने की स्मारक मायावती मुस्लिम दुश्मन है



 हाँ, मैं मायावती ( @Mayawati ) को सलाह दूँगा कि अगर कोर्ट के फैसले से साबित हो गया है कि मोइद खान निर्दोष थे, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए। ये सलाह नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी के आधार पर है, क्योंकि लोकतंत्र में नेता की बातों का असर समाज पर पड़ता है, और गलत आरोपों का समर्थन करने से कम्युनिटी को ठेस पहुँच सकती है। लेकिन ये मेरी राय है—कोई कानूनी बाध्यता नहीं। आइए डिटेल में समझते हैं, करंट फैक्ट्स (फरवरी 2026 तक) के आधार पर। केस का बैकग्राउंड (संक्षेप में): 2024 का घटनाक्रम: अयोध्या के भदरसा में मोइद खान (समाजवादी पार्टी के लोकल लीडर और बेकरी ओनर) और उनके एम्प्लॉयी राजू खान पर 12 साल की दलित लड़की से रेप का आरोप लगा। लड़की प्रेग्नेंट हुई, POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ, दोनों अरेस्ट हुए। प्रशासन ने मोइद की बेकरी और प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चलाया, दावा किया कि ये अवैध कब्जा था। hindustantimes.com भाजपा ने इसे राजनीतिक रूप से हाईलाइट किया, SP पर आरोप लगाया कि वो अपराधियों को बचाते हैं। मायावती का स्टैंड: तब मायावती ने बुलडोजर एक्शन को "संतोषजनक कार्रवाई" कहा, और SP को घेरा कि वो अपराधियों का बचाव कर रहे हैं। hindustantimes.com ये मिल्कीपुर बाई-इलेक्शन के समय का मुद्दा बना, जहाँ भाजपा ने "SP के लोग बेटियों से डरते हैं" जैसे स्लोगन इस्तेमाल किए। swarajyamag.com 2026 का ट्विस्ट (कोर्ट फैसला): जनवरी 2026 में POCSO कोर्ट ने मोइद खान को बरी कर दिया। डीएनए टेस्ट में मैच नहीं हुआ (फीटस से कोई लिंक नहीं), और सबूत अपर्याप्त पाए गए।

जिस रेप केस में चला था बुलडोजर उसमें मोईद खान बरी, यूपी सरकार पर बरसे अखिलेश, बोले- 'ऊपरवाले की अदालत में होगा पापों का हिसाब'

अयोध्या की पॉक्सो अदालत ने भदरसा गैंगरेप मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया. न्यायाधीश ने डीएनए रिपोर्ट म..

अयोध्या के चर्चित भदरसा... https://www.aajtak.in/uttar-pradesh/story/court-acquits-moid-khan-in-ayodhya-rape-case-akhilesh-yadav-slams-bjp-destructive-bulldozer-politics-lclam-rpti-2452809-2026-01-30

जेल गए, बुलडोजर चला... अब कोर्ट ने गैंगरेप केस में सपा नेता मोईद खान को किया बरी, नौकर निकला दोषी

भदरसा के इस चर्चित गैंगरेप केस में सपा नेता मोईद खान को बाइज्जत बरी कर दिया गया है. उनका नौकर राजू खान रेप का दोषी पाया गया है. उसे गुरुवार को सजा सुनाई जाएगी.

जेल गए, बुलडोजर चला... अब कोर्ट ने गैंगरेप केस में सपा नेता मोईद खान को किया बरी, नौकर निकला दोषी
सपा नेता मोईद खान.
अयोध्या:

अयोध्या की एक अदालत ने चर्चित भदरसा गैंगरेप केस में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान को बरी कर दिया है. मामले में DNA जांच रिपोर्ट ‘निगेटिव' आने के बाद मुख्य आरोपी समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान को बुधवार को बरी किया गया. विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) निरुपमा विक्रम ने खान (66) को बरी कर दिया और उनके नौकर राजू को दोषी करार दिया. यह मामला 12 साल की लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके गर्भवती होने से जुड़ा है. भदरसा पुलिस थाने में 29 जुलाई, 2024 को मोईद खान और उनके नौकर राजू के मामला खिलाफ दर्ज किया गया था.

सपा नेता ने वकील ने बताया निगेटिव आई डीएनए रिपोर्ट 

मोईद खान के वकील सईद खान ने बताया कि अदालत ने मोईद के नौकर राजू को बुधवार को दोषी करार दिया. उन्होंने बताया कि मोईद खान और राजू के डीएनए की जांच की गई थी जिसमें खान की डीएनए जांच ‘निगेटिव' आई, जबकि राजू की डीएनए जांच सकारात्मक आई, इसके आधार पर अदालत ने यह निर्णय दिया. मालूम हो कि इस केस में नाम आने के बाद सपा नेता के शॉपिंग कॉप्लेक्स पर बुलडोजर भी चला था. इस केस में सपा नेता को जेल भी जाना पड़ा था.

पीड़िता की मां ने कोर्ट में स्वीकारा- राजनीतिक दवाब में दर्ज कराया केस

कोर्ट में सपा नेता का डीएनए रिपोर्ट मैच नहीं हुआ. घटना के दौरान वीडियो बनाए जाने का दावा किया गया था, लेकिन कोई वीडियो सबूत के तौर पर अदालत में पेश नहीं हुआ. पुलिस विवेचना में घटनास्थल को लेकर कई विरोधाभास सामने आए. कभी बेकरी के बाहर पेड़ के नीचे, तो कभी बेकरी के अंदर घटना होना बताया गया. अदालत में पीड़िता की मां ने स्वीकार किया कि मुकदमा राजनीतिक दबाव में दर्ज कराया गया था.

बेकरी और शॉपिंग कॉप्लेक्स पर चला था बुलडोजर

मोईद खान के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद पिछले वर्ष 22 अगस्त को मोईद खान का बहुमंजिला शॉपिंग कांप्लेक्स अयोध्या जिला प्रशासन ने ढहा दिया था. साथ ही 3,000 वर्ग फुट क्षेत्र में निर्मित एक बेकरी भी ढहा दी गई थी. दुष्कर्म पीड़िता का लखनऊ के क्वीन मैरी अस्पताल में सात अगस्त को चिकित्सकों ने गर्भपात किया था.
 उत्तर प्रदेश के अयोध्या ज़िले में एक बच्ची के साथ कथित बलात्कार की घटना पर राजनीति तेज हो गई है, जहां सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी समाजवादी पार्टी आमने सामने हैं.

ये घटना भदरसा कस्बे की है.



बीजेपी का आरोप है कि अभियुक्त मोइद ख़ान समाजवादी पार्टी के नेता है इसलिए अपने रसूख का इस्तेमाल करके मामले को दो महीने से दबाए रखा है



बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित बच्ची के परिवार से मुलाक़ात की है जिसके बाद पीड़ित को लखनऊ में बेहतर इलाज के लिए भेजा गया है.

आपके लिए और

facebook.com +1 अब सवाल उठ रहे हैं: बुलडोजर एक्शन गलत था? योगी आदित्यनाथ सरकार से मुआवजा और माफी की माँग हो रही है। scribd.com मोइद की फैमिली और कम्युनिटी इसे राजनीतिक साजिश मानते हैं, खासकर मुस्लिम कम्युनिटी के खिलाफ। ब्लॉग पोस्ट का कंटेंट (जो आपने शेयर किया): आपका दिया लिंक (https://musliminventor.blogspot.com/2025/10/blog-post_30.html) एक पुरानी पोस्ट है (अक्टूबर 2025), जो BBC हिंदी की रिपोर्ट का रीपोस्ट है। इसमें केस की शुरुआत बताई गई है, बुलडोजर एक्शन, और मायावती के सपोर्ट का ज़िक्र है। लेकिन ये कोर्ट फैसले से पहले की है—कोई एक्विटल का मेंशन नहीं। ब्लॉगर का टोन क्रिटिकल है, इसे राजनीतिक वेंडेटा बताता है, लेकिन अपोलॉजी डिमांड स्पष्ट रूप से नहीं की गई। आपका कोट ("कोर्ट का फैसला के मुताबिक...") शायद किसी और कंटेक्स्ट से है, क्योंकि इस पोस्ट में कोर्ट फैसला नहीं है। क्यों माफी माँगनी चाहिए? (मेरा व्यूपॉइंट): नैतिक कारण: अगर आरोप गलत साबित हुए, तो मायावती जैसी सीनियर लीडर को अपनी पुरानी स्टेटमेंट पर रिफ्लेक्ट करना चाहिए। उन्होंने बुलडोजर को सपोर्ट किया था, जो अब इंजस्टिस लगता है। माफी से वो दिखा सकती हैं कि वो न्याय की पक्षधर हैं, न कि राजनीतिक स्कोरिंग की। ये मोइद खान, उनकी फैमिली, और प्रभावित कम्युनिटी (मुस्लिम और SP सपोर्टर्स) के लिए होगा—जैसा आपने कहा। राजनीतिक कारण: BSP की इमेज दलित और अल्पसंख्यक समर्थक की है। अगर वो माफी माँगती हैं, तो ये उन्हें मजबूत बना सकता है, खासकर 2027 UP इलेक्शन में। लेकिन अगर वो इग्नोर करती हैं, तो विपक्ष (SP, कांग्रेस) इसे इस्तेमाल कर सकता है। काउंटर पॉइंट: मायावती कह सकती हैं कि उनका स्टैंड शुरुआती सबूतों पर था, और कोर्ट फैसला बाद में आया। कोई कानूनी दबाव नहीं है—ये पर्सनल चॉइस है। साथ ही, केस में अभी अपील पॉसिबल है (सरकार हाई कोर्ट जा सकती है)। scribd.com अंत में, राजनीति में माफी दुर्लभ है, लेकिन ये सही समय है ट्रस्ट बिल्ड करने का। अगर मायावती इसे मानती हैं, तो ट्वीट या स्टेटमेंट से कर सकती हैं। अगर आप और डिटेल चाहें (जैसे कोर्ट ऑर्डर की कॉपी), तो बताएं—मैं चेक कर सकता हूँ!

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