राजेश गुलाटी ने अनुपमा गुलाटी के 72 #टुकड़े किए और D फ्रीजर में रक्खा आफताब ने श्रद्धा के 35 टुकड़े

Manjula (32). She was serving as a home guard attached to the Mahadevapura police station. The accused husband has been identified as Pradeep. The incident occurred on Sunday evening at her parental residence in B Narayanapura.

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  BENGALURU: A shocking domestic tragedy unfolded in Mahadevapura when a home guard was stabbed to death by her husband in front of their two children and family members after he reportedly lured her into a reconciliation meeting and attacked her with a knife. Get breaking news anytime, anywhere. Download the TOI app now! Invest in Asia's fastest growing business corridor Hiranandani Ebony · Sponsored The deceased has been identified as Manjula (32). She was serving as a home guard attached to the Mahadevapura police station. The accused husband has been identified as Pradeep. The incident occurred on Sunday evening at her parental residence in B Narayanapura. Based on the preliminary investigation, police said Pradeep had become addicted to online betting and had been facing financial and family problems. Before the murder, he reportedly recorded selfie videos claiming that the betting habit had ruined his family and stating that both he and his wife would die. A senior officer sa...

अता तुर्क मुस्तुफा कमाल पासा ने इस्लामिक संस्कृति के खिलाफ युद्ध किया। और तुर्की में दाढ़ी टोपी और अज़ान पर पबनादी लगाया। सुरु में वह टोपी पहनता था। लेकिन जब इस्तेमाल करें तो सत्ता पर कब्ज़ा मिल जाएगा। इस्लाम को तुर्की से निकाल दिया

 असद ओवैसी भी मोलवियों को लिफ़ाफ़े पर ज़िन्दगी गुजारने वाला कहता है वह उसे "फंड चोर" कहता है। उसने सबसे बड़े मुस्लिम संगठन—जमीयत उलेमा-ए-हिंद—के खिलाफ अपनी पार्टी की ट्रोल आर्मी को छोड़ दिया है, और उलेमाओं को "जुम्मन" कहकर संबोधित करता है।

मुसलमानो की नज़र में खुद को कटटर मुसलमान दिखाने के लिए मुस्तफा कमाल पाशा ने क्रिस्चियन आबादी वाले अर्मीनिया में नरसंहार किया .

ठीक उसी की तरह अकबर ओवैसी ने 2012 में 15 मिनट्स के लिए पुलिस जाता देने वाली बात कही मुर्ख मुसलमान उसे भी अपना लीडर बना लिए


असली मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क कौन था जिसने ओटोमन साम्राज्य को खत्म करने और अर्मेनियाई नरसंहार शुरू करने में मदद की?



. अज़ान पर पाबंदी यह बात सही है कि मुस्तफा कमाल अतातुर्क के नेतृत्व वाली सरकार ने 1932 में अरबी अज़ान पर रोक लगा दी थी।

बदलाव क्या था? धार्मिक मामलों के निदेशालय (Diyanet) ने यह आदेश दिया कि अज़ान अब केवल तुर्की भाषा में पढ़ी जाएगी।

यह पाबंदी कब तक लागू रही? यह 1950 तक, यानि लगभग 18 साल तक लागू रही, जिसके बाद इसे हटा लिया गया और फिर से अरबी अज़ान की अनुमति दे दी गई।

🧔 2. दाढ़ी रखने पर पाबंदी , ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने खुद अपनी मूंछें रखी थीं। हालांकि, उनके सुधारों (जैसे टोपी कानून) ने पारंपरिक इस्लामी पोशाक को प्रतिबंधित कर दिया था।

बाद की पाबंदियां: दाढ़ी पर सरकारी पाबंदी उनके समय में नहीं, बल्कि बाद में आई। 1980 के दशक के फौजी तख्तापलट के बाद, सेना ने विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और छात्रों के लिए दाढ़ी रखना बंद कर दिया था, क्योंकि यह उस समय कट्टरपंथी विचारधारा का प्रतीक माना जाने लगा था।

🔒 3. मस्जिदों के ताले लगाना यह भी सही है कि अतातुर्क युग के दौरान कई मस्जिदों को बंद किया गया या उनके धार्मिक कार्य बदले गए, लेकिन अक्सर यह एक विशेष इमारत हागिया सोफिया (Ayasofya) के संदर्भ में कहा जाता है।

हागिया सोफिया क्या है? यह एक ऐतिहासिक इमारत है जो पहले एक गिरजाघर थी। 1453 में ओटोमन साम्राज्य ने इसे जीतकर मस्जिद में बदल दिया। अतातुर्क के सुधारों के दौरान ही इस इमारत को सबसे ज़्यादा निशाना बनाया गया।

 अतातुर्क ने हागिया सोफिया को मस्जिद के रूप में बंद करवा दिया। कुछ स्रोतों के अनुसार, यह 1930 के आसपास हुआ। बाद में 1934 में एक कैबिनेट निर्णय के तहत इसे एक संग्रहालय (Museum) में बदल दिया गया और 1935 में इसे जनता के लिए खोल दिया गया।

हालिया बदलाव: जुलाई 2020 में, तुर्की के सर्वोच्च प्रशासनिक न्यायालय ने अतातुर्क के इस फैसले को रद्द कर दिया और इसे फिर से एक मस्जिद के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी।




जानकारों ने सबसे पहले यह बात बताई है कि मुस्तफ़ा का जन्म और पालन-पोषण सलोनिका शहर में हुआ था, जिसकी ज़्यादातर आबादी उन्नीसवीं सदी के बीच में यहूदी थी। असल में, उस समय सलोनिका दुनिया का अकेला ऐसा शहर था जहाँ ज़्यादातर यहूदी आबादी थी।

डोनमे यहूदियों का मानना ​​था कि शबताई त्ज़वी मसीहा थे, वे कबाली रीति-रिवाज़ करते थे, और लाडिनो में प्रार्थनाएँ करते थे, जो ओटोमन यहूदियों की भाषा है” (वही, पेज 143)। मुस्तफ़ा कमाल का कबाली संकेतों, जादू-टोने की ताकत में विश्वास, पूरी ज़िंदगी बना रहा।

एक और मशहूर वेस्टर्न पब्लिकेशन, अमेरिकन लिटरेरी डाइजेस्ट, 1922 में मुस्तफ़ा कमाल को “वंश से स्पेनिश यहूदी” बताता है।

सलोनिका (थेसालोनिकी) की जनसांख्यिकी यहूदी बहुलता का दावा सही नहीं है: आपके अनुसार, सलोनिका वह दुनिया का एकमात्र शहर था जहाँ यहूदियों का बहुमत था। यह कथन इतिहास की सटीक तस्वीर नहीं दिखता। हालाँकि यहूदी समुदाय सलोनिका में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली जनसंख्या थी, लेकिन विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के अनुसार, १९वीं सदी के अंत और २०वीं सदी की शुरुआत में यहूदी कभी भी पूर्ण बहुमत में नहीं रहे।

यूरोपीय यात्री Fallmerayer के एक आकलन (१८४०) के अनुसार, शहर की कुल आबादी ७०,००० थी, जिसमें ३०-३६,००० यहूदी, लगभग २५,००० तुर्क और बाकी यूनानी, बल्गारियाई आदि थे। यहाँ यहूदियों का अनुपात लगभग ४०-५०% के बीच था, बहुमत नहीं।

**१०० यहूदियों का एक रिव्यू ** के अनुसार, सन् १९०५ में सलोनिका की कुल आबादी १२०,००० थी, जिसमें लगभग ७५,००० यहूदी थे, यानी लगभग ६२.५%। कुछ अन्य स्रोत १९१२ के आसपास यहूदी आबादी ९०,००० तक और बहुमत के करीब बताते हैं।

मुख्य बिंदु: सलोनिका एक बहुसांस्कृतिक, बहु-जातीय शहर था जहाँ मुस्लिम तुर्क, यूनानी रूढ़िवादी ईसाई और सेफ़र्डी यहूदी सदियों से साथ रहते थे। यहूदी एक मजबूत और समृद्ध  थे,

अतातुर्क की उत्पत्ति (Dönmeh / यहूदी होने का दावा) 'Dönmeh' कौन थे?: Dönmeh (तुर्की में 'धर्म-परिवर्तक') १७वीं सदी के एक समूह के वंशज हैं, जिसने Sabbatai Zevi नामक एक यहूदी धार्मिक नेता को मसीहा माना। जब इस्लाम में परिवर्तित होने या मौत के आदेश का सामना करना पड़ा, तो ज़ेवी और उनके हज़ारों अनुयायियों ने बाहरी रूप से इस्लाम अपना लिया। कुछ सौ परिवारों ने बाद में सलोनिका में बसकर गुप्त रूप से अपनी पुरानी यहूदी मान्यताओं और कबालिस्टिक प्रथाओं को जारी रखा। समय के साथ, Dönmeh समुदाय तुर्की के आधुनिकीकरण और धर्मनिरपेक्षता के आंदोलन में एक भूमिका निभाने लगे।

Dönmeh और अतातुर्क के बीच कड़ी का दावा: यह सुझाव कि मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क स्वयं Dönmeh मूल का था या यहूदी था, एक पुरानी और व्यापक रूप से सिद्धांत है। इस दावे के पीछे के तर्क हैं:

अतातुर्क का जन्म सलोनिका में हुआ, जहाँ बड़ा यहूदी और Dönmeh समुदाय था। कुछ Dönmeh (जैसे, उनके शिक्षक Şemsi Efendi) ने अतातुर्क के प्रारंभिक जीवन में भूमिका निभाई थी। तत्कालीन पश्चिमी प्रेस (जैसे, American Literary Digest, 1922) में कभी-कभी यह अफवाह उड़ाई जाती थी कि वे "वंश से स्पेनिश यहूदी" हैं। इतिहासकार और वैज्ञानिक आम सहमति: हालाँकि ये दावे मौजूद हैं, लेकिन अधिकांश मुख्यधारा और आधिकारिक इतिहासकार इन्हें निराधार और षड्यंत्र सिद्धांतों पर आधारित मानते हैं:

मुख्य जांच: प्रतिष्ठित तथ्य-जांच संगठन Teyit.org ने इन दावों की विस्तृत जांच की और पाया कि इन सभी के लिए कोई ठोस ऐतिहासिक, अभिलेखीय या आनुवंशिक साक्ष्य मौजूद नहीं है। प्रचलित किताबों में गढ़े गए उद्धरणों और झूठे संदर्भों का भी खुलासा किया गया।

अतातुर्क की भूमिका: ओटोमन साम्राज्य का अंत प्रश्न: "जिसने ओटोमन साम्राज्य को खत्म करने में मदद की।"

उत्तर: यह कहना ऐतिहासिक रूप से सटीक नहीं होगा कि अतातुर्क ने अकेले या सीधे तौर पर साम्राज्य को "खत्म" किया। ओटोमन साम्राज्य का विघटन एक लंबी और जटिल प्रक्रिया थी।

प्रथम विश्व युद्ध में हार (१९१८): ओटोमन साम्राज्य केन्द्रीय शक्तियों (जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी) के साथ युद्ध हार गया था। इस हार के बाद साम्राज्य पहले से ही अस्त-व्यस्त और कब्जे में था।

तुर्की राष्ट्रवादी आंदोलन का नेतृत्व: सन् १९१९ में अतातुर्क ने तुर्की राष्ट्रवादी आंदोलन (Kurtuluş Savaşı) का नेतृत्व किया। उनका लक्ष्य सहयोगी दलों धार्मिक मुसलमानों से तुर्की को आज़ाद कराया के कब्जे से शेष तुर्की मातृभूमि (अनातोलिया) को मुक्त कराना था।

सल्तनत का उन्मूलन (शासन व्यवस्था का अंत): युद्ध जीतने के बाद, १ नवम्बर १९२२ को अतातुर्क के नेतृत्व में तुर्की की नई संसद ने ओटोमन सल्तनत (Padishah / Badshah का पद) को समाप्त कर दिया। इस कानूनी कृत्य ने ६२३ साल पुराने उस्मानी ख़िलाफ़त को ख़तम किया और लोकतंत्र पर्किरया के नाम पर इस्लाम पर पाबंदी लगा दिया ओटोमन साम्राज्य के राजनीतिक अस्तित्व को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया। २९ अक्टूबर १९२३ को गणतंत्र की स्थापना के साथ यह प्रक्रिया पूरी हुई।



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