राजेश गुलाटी ने अनुपमा गुलाटी के 72 #टुकड़े किए और D फ्रीजर में रक्खा आफताब ने श्रद्धा के 35 टुकड़े
न्यायमूर्ति सूर्यकांत इन आरोपों के बावजूद न्यायिक पदानुक्रम में आगे बढ़ते रहे और वर्तमान में भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश हैं .
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Don’t have time to waste’: Supreme Court refuses urgent hearing of plea against police action on student protesters
मुख्य आरोपों का विवरण मादक पदार्थों के मामलों में जमानत को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप: आपके द्वारा उल्लिखित कैदी हरप्रीत सिंह से संबंधित मामला भी इन्हीं आरोपों का हिस्सा है।
आरोप: वर्ष 2017 में पंजाब के एक कैदी, सुरजीत सिंह (या हरप्रीत सिंह) ने आरोप लगाया कि जस्टिस सूर्यकांत ने अक्टूबर 2015 और फरवरी 2017 के बीच आठ मादक पदार्थों (एनडीपीएस) के मामलों में जमानत देने के लिए रिश्वत ली। आरोपों के अनुसार, जमानत देने के लिए कुल 3.1 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई, जिसमें जज के भाई और भतीजे को बिचौलिया बताया गया ।
परिणाम: इस शिकायत के बाद कोई औपचारिक जांच नहीं हुई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत को अक्टूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश और बाद में 2019 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया ।
संपत्ति सौदों और कर चोरी के आरोप:
आरोप: 2012 में, चंडीगढ़ के एक रियल एस्टेट एजेंट, सतीश कुमार जैन ने तत्कालीन CJI को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि जस्टिस सूर्यकांत ने कर चोरी और कई अवैध संपत्ति सौदों में हिस्सा लिया। आरोप था कि उन्होंने संपत्तियों का वास्तविक मूल्य से कम दिखाकर स्टाम्प ड्यूटी से बचने की कोशिश की और बेनामी संपत्ति रखी। जैन ने दावा किया कि इस तरह से 7.63 करोड़ रुपये की बचत की गई ।
परिणाम: इस शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई ।
न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति में जातिवाद और भ्रष्टाचार के आरोप:
आरोप: अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों के चयन में "भ्रष्टाचार और जातिवाद" के आरोप भी लगे, हालांकि इनका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया ।
न्यायमूर्ति ए.के. गोयल की आपत्ति और उसका परिणाम आपने न्यायमूर्ति ए.के. गोयल द्वारा की गई शिकायत का भी उल्लेख किया है, जो एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम था:
वर्ष 2018 में, तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जज, जस्टिस ए.के. गोयल ने तत्कालीन CJI दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर जस्टिस सूर्यकांत को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर अपनी असहमति जताई थी ।
जस्टिस गोयल ने कहा कि भ्रष्टाचार, संपत्ति सौदों और जातिवाद के आरोपों की गहन जांच के बिना उनकी पदोन्नति उचित नहीं होगी। उन्होंने आरोपों की जांच और जस्टिस सूर्यकांत की संपत्तियों का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने की सिफारिश की थी ।
परिणाम: कोलेजियम ने जस्टिस गोयल की आपत्ति को खारिज कर दिया और बिना जांच के जस्टिस सूर्यकांत को पदोन्नत कर दिया गया ।
इसके अलावा, वरिष्ठ अधिवक्ता पृथ्वी भूषण ने भी 2019 में तत्कालीन CJI रंजन गोगोई को पत्र लिखकर इन आरोपों की जांच की मांग की थी ।
सारांश आरोप का विवरण किसने लगाया? परिणाम मादक पदार्थों के मामलों में रिश्वत लेकर जमानत देना कैदी सुरजीत सिंह (2017) कोई जांच नहीं; पदोन्नति जारी रही अवैध संपत्ति सौदे और कर चोरी रियल एस्टेट एजेंट सतीश कुमार जैन (2012) कोई कार्रवाई नहीं अधीनस्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति में जातिवाद और भ्रष्टाचार सुप्रीम कोर्ट की फाइलों में गोपनीय शिकायत कोई जांच नहीं पदोन्नति के खिलाफ औपचारिक आपत्ति न्यायमूर्ति ए.के. गोयल (2018) कोलेजियम ने आपत्ति खारिज की; पदोन्नति हुई
आपको पता होना चाहिए कि आपके अब तक CJI Surya Kant पर क्या क्या आरोप लग चुके है?
क्या आप जानते हैं कि उन पर जातिवाद,भ्रष्टाचार के आरोप भी लग चुके है?
पंजाब के एक कैदी हरप्रीत सिंह ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि जस्टिस सूर्यकांत ने 8 ड्रग्स मामलों में आरोपीयों को जमानत देने के लिए रिश्वत ली ये मामले 2015-2017 के बीच पंजाब में ऑपिओइड महामारी के संदर्भ में थे।
रिजल्ट: शिकायत कोलेजियम के पास 6 साल से अधिक समय तक लंबी रही। कोई जांच नहीं हुई, और वे पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में बने रहे। अक्टूबर 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया।
चंडीगढ़ के वकील के.डी. अग्रवाल ने 2011 में शिकायत की कि जस्टिस सूर्यकांत ने एक मामले में पूर्व सहकर्मी के बेटे को लाभ पहुंचाने के लिए शपथ का उल्लंघन किया और तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा। इसमें झूठे साक्ष्य और पक्षपात का आरोप था। रिजल्ट: कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस A.K गोयल ने CJI दीपक मिश्रा को पत्र लिखा। उन्होंने भ्रष्टाचार, जातिवाद और अन्य शिकायतों पर स्वतंत्र जांच की मांग की, जिसमें संपत्तियों की वैल्यूएशन रिपोर्ट मांगी गई। गोयल ने कहा कि इन आरोपों के बिना जस्टिस सूर्यकांत की पदोन्नति अनुचित है।
रिजल्ट: CJI रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली कोलेजियम ने गोयल की आपत्ति को खारिज कर दिया। जस्टिस सूर्यकांत 2019 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
और अब सूर्यकान्त शर्मा 53 वें CJI है।
स्रोत: The charavan
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