राजेश गुलाटी ने अनुपमा गुलाटी के 72 #टुकड़े किए और D फ्रीजर में रक्खा आफताब ने श्रद्धा के 35 टुकड़े

Manjula (32). She was serving as a home guard attached to the Mahadevapura police station. The accused husband has been identified as Pradeep. The incident occurred on Sunday evening at her parental residence in B Narayanapura.

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  BENGALURU: A shocking domestic tragedy unfolded in Mahadevapura when a home guard was stabbed to death by her husband in front of their two children and family members after he reportedly lured her into a reconciliation meeting and attacked her with a knife. Get breaking news anytime, anywhere. Download the TOI app now! Invest in Asia's fastest growing business corridor Hiranandani Ebony · Sponsored The deceased has been identified as Manjula (32). She was serving as a home guard attached to the Mahadevapura police station. The accused husband has been identified as Pradeep. The incident occurred on Sunday evening at her parental residence in B Narayanapura. Based on the preliminary investigation, police said Pradeep had become addicted to online betting and had been facing financial and family problems. Before the murder, he reportedly recorded selfie videos claiming that the betting habit had ruined his family and stating that both he and his wife would die. A senior officer sa...

वीर सावरकर को अंग्रेज सरकार पेंशन देती थी

 हाई प्रोफाइल हत्या वाले केस में जब कोई सुराग नहीं मिलता तो पुलिस अज्ञात लोगो को गिरफ्तार करती है उन्ही के साथ पुलिस अपने एक जासूस को भी गिरफ्तार कर लेती है पुलिस लॉकअप  में रहते हुवे आरोपी एक दूसरे का राज जान्ने की कोसिस करते हैं 


वीर सावरकर को अंग्रेज सरकार पेंशन देती थी 

किस काम की वजह से देती थी इसके बारे में कभी उनके समर्थक बात नहीं करते क्या कोई किसी बागी को पेंशन देता है 



1904 वी डी सावरकर  अनंत लक्ष्मण करकरे ने नासिक के जिलाधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी। 21 दिसंबर, 1909 को, ए एम टी जैक्सन नासिक के मजिस्ट्रेट एक थिएटर का आनंद ले रहे थे, जहां उनके स्थानांतरण की पूर्व संध्या पर उनके सम्मान में एक नाटक का मंचन किया गया था। अनंत लक्ष्मण करकरे नाम के  युवक ने थिएटर में इस इंडोलॉजिस्ट और "" जैक्सन की गोली मारकर हत्या कर दी। इस सनसनीखेज हत्याकांड को नासिक षडयंत्र केस के नाम से जाना जाता है। 27  को दोषी ठहराया गया और दंडित किया गया। गणेश सावरकर को काला पानी भेजा गया 

सावरकर को भी अंग्रेजो ने जेल भेजा क्योंकि  क्रांतकारियों को सजा तो सुना दी गई थी लेकिन मुज़रिम की असल पहचान न हो सकी थी 


सावरकर वीर तो थे अपनी कद काठी से ज्यादा वीर थे वह अंग्रेज सरकार के एजेंट थे तब भी वीर ही कहा जायेगा देस भगत थे तब भी वीर ही कहा जायेगा किसी साधारण मनुष्य के जीवन में इतनी सारी घटनाये
नहीं होती 

कहते हैं काला पानी में खाना पानी ठीक से नहीं मिलता था। कैदियों को प्रताड़ित किया जाता था लेकिन वीर सावरकर का वजन 12 से 15 पाउंड मात्र 4 महीने में बढ़ गया। जिसे खाने पीने की सुविधा ना हो उसका वजन घटना चाहिए। लेकिन वीर सावरकर का वजन बढ़ रहा था, जबकि दूसरे कैदियों का वजन घट रहा था।

विनायक सावर का जन्म महाराष्ट्र (उस समय, 'बॉम्बे प्रेसिडेन्सी') में नासिक के निकट भागुर गाँव में हुआ था। उनकी माता जी का नाम राधाबाई तथा पिता जी का नाम दामोदर पन्त सावरकर था। इनके दो भाई गणेश (बाबाराव) व नारायण दामोदर सावरकर तथा एक बहन नैनाबाई थीं। जब वे केवल नौ वर्ष के थे तभी हैजे की महामारी में उनकी माता जी का देहान्त हो गया। इसके सात वर्ष बाद सन् 1899 में प्लेग की महामारी में उनके पिता जी भी स्वर्ग सिधारे। इसके बाद विनायक के बड़े भाई गणेश ने परिवार के पालन-पोषण का कार्य सँभाला। दुःख और कठिनाई की इस घड़ी में गणेश के व्यक्तित्व का विनायक पर गहरा प्रभाव पड़ा। विनायक ने शिवाजी हाईस्कूल नासिक से 1901 में मैट्रिक की परीक्षा पास की। बचपन से ही वे पढ़ाकू तो थे ही अपितु उन दिनों उन्होंने कुछ कविताएँ भी लिखी थीं। आर्थिक संकट के बावजूद बाबाराव ने विनायक की उच्च शिक्षा की इच्छा का समर्थन किया। इस अवधि में विनायक ने स्थानीय नवयुवकों को संगठित करके मित्र मेलों का आयोजन किया। शीघ्र ही इन नवयुवकों में राष्ट्रीयता की भावना के साथ क्रान्ति की ज्वाला जाग उठी।[10] सन् 1901 में रामचन्द्र त्रयम्बक चिपलूणकर की पुत्री यमुनाबाई के साथ उनका विवाह हुआ। उनके ससुर जी ने उनकी विश्वविद्यालय की शिक्षा का भार उठाया। 1902 में मैट्रिक की पढाई पूरी करके उन्होने पुणे के फर्ग्युसन कालेज से बी॰ए॰ किया। इनके पुत्र विश्वास सावरकर एवं पुत्री प्रभात चिपलूनकर थी।

कांग्रेस सरकारों ने स्कूल की किताबों में सावरकर को वीर सावरकर पढ़ाया 

बल्कि देस के दूसरे सहीद क्रांतकारियों से ज्यादा पढ़ाया 

कांग्रेस सरकार ने वीर सावरकर के नाम टिकिट भी जारी किया था 


सा
वरकर को 1920 के करीब छोड़ दिया गया था और ₹60 महीने उन्हें पेंशन दी जाती थी, जबकि उस वक्त आर्मी के कैप्टन को भी मात्र ₹5 पेंशन मिलती थी।

माफ़ी मांगने से यदि हत्या आरोपी की साजा माफ़ होती तो संसार के किसी हत्यारे को कभी साजा ना काटनी पड़ती सभी हत्यारे सजा होने के बाद माफ़ी तो मांगते ही हैं परन्तु  सावरकर को कलेक्टर की हत्या में शामिल होने के जुर्म के बाद भी माफ़ी मिली 

गाँधी की हत्या के बाद सावरकर नाथू राम गोडसे से कभी जेल में मिलने नहीं गए 

सावरकर जेल से निकलने के बाद कला पानी की सजा काट करे क्रांतकारियों से भी कभी नहीं मिले 


यह कोस्प्रेसी भारत वासियो को हजम नहीं हुई 

1909 में इन्होंने लन्दन से बार एट ला (वकालत) की परीक्षा उत्तीर्ण की परन्तु उन्हें वहाँ वकालत करने की अनुमति नहीं मिली।इस पुस्तक को सावरकार जी ने पीक वीक पेपर्स व स्काउट्स पेपर्स के नाम से भारत पहुचाई थी।

सावरकर बैरिस्टर थे  कभी किसी क्रांतकारी क मुकदमा नहीं लड़ा 

भगत सिंह जैसे लोगो को फांसी होगी 

मदनलाल ढींगरा ने एक सार्वजनिक बैठक में अंग्रेज अफसर कर्जन की हत्या कर दी।

सेलुलर जेल में



पोर्ट ब्लेयर की सेलुलर जेल के सामने सावरकर की प्रतिमा

काला पानी के सजा के समय कई लोगो ने सावरकर को अपनी आँखों से देखा वह दिल्ली और बंगाल में दिखे थे लोगो में चर्चा होने लगी सावरकर को जेल नहीं हुई है तब उनके गिरोह के लोग कहने लगे सावरकर बुल बुल पर बैठ कर जेल की खिड़की से बहार निकल जाते हैं 

वह दिब्य शक्ति जानते हैं 



1947 से पहले अंग्रेज सरकार ₹4 अपने रिटायर्ड सिपाहियों को पेंशन देती थी जबकि वीर सावरकर को ₹60 महीने पेंशन मिलती थी। ₹60 पेंशन एक बड़े  अधिकारी लोगों को ही मिल सकती है जिसे स्टेट लेवल का अधिकारी कहा जाए। उसी को इतनी बड़ी पेंशन मिलती थी। बाकी लोगों को ₹2 चार रुपए डी ग्रेड सी ग्रेड लोगों की पेंशन बहुत कम होती थी।

सावरकर का माफ़ीनामा सबसे पहले 1975 में प्रकाशित मशहूर दक्षिणपन्थी इतिहासकार आर सी मजूमदार की किताब Penal Settlements in Andamans में बाहर आया। 

इसमें उन्होंने अंडमान के दस्तावेज़ खंगाले थे और पाया कि 2 लोगों, अरविंद घोष के भाई वारींद्र नाथ घोष और विनायक सावरकर ने माफ़ीनामे लिखे।


जेल में रहने के बाद भी उन्हें बहार देखा गया 

सावरकर कद काठी से बहोत कमजोर थे वह खुद किसी से लड़ नहीं सकते थे 

उन्होंने अंग्रेजो को चिट्ठी लिखी है 

उसमे उन्होंने नौकरी करने को कहा है वह रिकॉर्ड में है 


नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए नासिक षडयंत्र काण्ड के अन्तर्गत इन्हें 7 अप्रैल, 1911 को काला पानी की सजा पर सेलुलर जेल भेजा गया। उनके अनुसार यहां स्वतंत्रता सेनानियों को कड़ा परिश्रम करना पड़ता था। कैदियों को यहां नारियल छीलकर उसमें से तेल निकालना पड़ता था। साथ ही इन्हें यहां कोल्हू में बैल की तरह जुत कर सरसों व नारियल आदि का तेल निकालना होता था। इसके अलावा उन्हें जेल के साथ लगे व बाहर के जंगलों को साफ कर दलदली भूमी व पहाड़ी क्षेत्र को समतल भी करना होता था। रुकने पर उनको कड़ी सजा व बेंत व कोड़ों से पिटाई भी की जाती थीं। इतने पर भी उन्हें भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था।।[12] सावरकर 4 जुलाई, 1911 से 21 मई, 1921 तक पोर्ट ब्लेयर की जेल में रहे। 



जिस कैदी को काला पानी की सजा होती थी, उसके सर के माथे की चमड़ी जला दी जाती थी जिससे उसकी पहचान होती थी। कभी वह छुपा नहीं सकता था कि वह काला पानी का कैदी है, परंतु सावरकर जी के साथ अंग्रेजों ने ऐसा नहीं किया। उनके माथे की चमड़ी जलाई नहीं गई थी।


काला पानी की प्रताड़ना और भूखे रखना बेडी हथकडी पहनने की बातें तो आपने सुनी होगी। वीर सावरकर को कागज कलम भी मुहैया कराया गया था। वह जेल से खत भी लिखते थे और जेल में रहकर उन्होंने किताबें भी लिखी और उनका वजन भी जेल में बढ़ गया, जबकि दूसरे कैदियों को यह सुविधा नहीं थी।


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