राजेश गुलाटी ने अनुपमा गुलाटी के 72 #टुकड़े किए और D फ्रीजर में रक्खा आफताब ने श्रद्धा के 35 टुकड़े

ब्राह्मणवादी जीवन, गंदगी खाने वाली—और अपने ही मल से सनी—गाय की पूंछ छूने और उसके गोबर व मूत्र का सेवन करने से पवित्र और शुद्ध माना जाता था! जानवर देवता है; और जो इंसान देवता की तरह व्यवहार करता है, वह जानवर है!

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 और उसके गोबर और मूत्र का मिश्रण पीते, इस यकीन के साथ कि इससे उनका जीवन पवित्र हो जाएगा! यह वही धार्मिक पवित्रता है जो डॉ. अंबेडकर जैसे की परछाईं पड़ने से ही तुरंत अपवित्र हो जाती थी; यह वही ब्राह्मणवादी जीवन है जिसे तुकाराम जैसे संत के साथ एक ही कतार में बैठकर दही-चावल खाने से ही अपवित्र मान लिया जाता था! 1.5 ज़रूरत गायों को पालने की है, न कि सिर्फ़ उनकी पूजा करने की! चूँकि गाय हिंदुस्तान जैसे कृषि-प्रधान देश के लिए बहुत काम की चीज़ है, इसलिए यह स्वाभाविक है कि हम हिंदू वैदिक काल से ही इसे बहुत मानते आए हैं। ऐसा जानवर किसे पसंद नहीं आएगा जो इतना प्यारा, शांत, सीधा-सादा, सुंदर और भरपूर दूध देने वाला हो? हमारे देश में, माँ के दूध के बाद गाय का दूध ही एकमात्र ऐसा दूध है जो बच्चे को सचमुच पचता है और फ़ायदा पहुँचाता है। जब इंसान शिकारी-संग्राहक (hunter-gatherer) के दौर से आगे बढ़ा, तब से ही गाय इंसानों की पक्की साथी रही है। यह हमें दूध, दही और घी देती है जो आज भी हमारा पोषण करते हैं। इसलिए, इस बेहद उपयोगी जानवर के साथ गहरा, पारिवारिक जुड़ाव महसूस करना इंसानी फ़ितरत है। गाय की रक्षा और...

भारत के बड़े बीफ़ एक्सपोर्टर्स का संबंध हिंदू समुदाय से हैबूचड़खानों का ज़िक्र आने पर आम लोग जहाँ मानते हैं कि इस पेशे में एक ख़ास मज़हब और वर्ग के लोग ही काम करते हैं..

 भारत के बड़े बीफ़ एक्सपोर्टर्स का संबंध हिंदू समुदाय से हैबूचड़खानों का ज़िक्र आने पर आम लोग जहाँ मानते हैं कि इस पेशे में एक ख़ास मज़हब और वर्ग के लोग ही काम करते हैं..




भारत में कुल 72 बूचड़खाने हैं जिसे लाइसेंस प्राप्त हैं जिसमें से अकेले यूपी में 38बूचड़खाने हैं..इसमें 4 बूचड़खाने ऐसे भी हैं जिसे सरकार खुद चलाती है..जोकि आगरा, सहारनपुर में है..वहीं दो अन्य प्रस्तावित बूचड़खाने लखनऊ और बरेली में है..अलीगढ़ में हिंद एग्रो आईएमपीपी पहला बूचड़खाना है




 जिसे1996 में शुरु किया गया था..यहां यह समझने वाली बात यह है कि खाड़ी के देशों में भैंस के मांस की काफी मांग है और भारत इसके लिए सबसे कारगर देश है..इसकी सबसे बड़ी वजह है कि यहां सस्ता मांस मिलता है और विक्रेताको इस बात का भरोसा मिलता है कि उसे हलाल मांस ही दिया जा रहा है..

 देश का सबसे बड़ा बूचड़खा


ना तेलंगाना के मेडक ज़िले में रूद्रम गांव में है. तक़रीबन 400 एकड़ में फैले इस बूचड़खाने के मालिक सतीश सब्बरवाल हैं. यह बूचड़खाना अल कबीर एक्स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड चलाता है. 

भारत कुल मीट निर्यात में तीसरा..और बफैलो मीट निर्यात में दुनिया में पहला स्थान रखता है..भारत70 से ज्यादा देशों को फ्रोजन और फ्रेश चिल्ड मीट का एक्सपोर्ट करता है..इसमें करीब 97 फीसदी हिस्सा फ्रोजेन बफैलो मीट का होता है..बफैलो मीट के लिए भारत के प्रमुख ग्राहक देश वियतनाम,मलेशिया,इजिप्ट,इराक,सऊदीअरब,फिलीपींस, इंडोनेशिया, यूएई, अल्जीरिया और रूस हैं..देश में करीब 11 अत्याधुनिक मीट प्लांट हैं..जहां फ्रोजेन बफैलो मीट का उत्पादन किया जाता है..



# इसलिए शाकाहार और मांसाहार बाबत मूर्ख और डबल स्टैंडर्ड लोगों की बातों के चक्कर में आकर अपना समय बरबाद ना करें🙏🙏


रवींद्र राव

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